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Swadhyay

By Ranjanaoli

 

सुबह बिस्तरसे उठते बोलें:


आओजी बाला मारे घेर आओजी , आओजी श्यामा मारे घेर आओजी ।
एकलडी परदेशमां मुने, मूकीने कां चाल्या ॥१
मुने हुति नींदलडी, तमे सुती मूकीने कां राते ।
जागीने जोऊ तां पियुजी ना पासे, पछीतो थासे प्रभाते ॥२
कलकलीने कहुं छुं तमने, आओजो आणे क्षणे ।
मारा मनना मनोरथ पूरन करजो, इन्द्रावती लागी चरणे ॥ ३


O my dear Lord do visit my home, O Shyama do visit my home!
Where hast Thou gone my Lord, leaving me alone in this foreign land!
I was fast asleep; where did You go leaving me alone in the dark of the night?
How I lamented your absence when I woke up in the morning and did not find you by my side
I beg Thee pray come back to me this very moment.
And drench my soul with Thy Infinite Love, Indravati says falling at your feet.


स्नानके समय:


ऊठ के नहाइये जमुना जी में किजे सकल सिनगार ।
साथ सनमनधि मिलके खेलेन संग भरतार ॥

धाम तलाव कुन्ज वन जोहें, माणिक नहरें वनकी सोहे ।
पश्चिम चौगान बडोवन कहिये, पुखराज जमुनजी लहिये ॥

आठ सागर आठ जिमीके, येह पच्चीस पक्ष धामधनी के ॥

नूर नीर क्षीर दधि सागर, घृत मधु एक ठौर ।
रस सर्वरस सागर, बिना मोमिन न पावे कोई और ॥


श्री राजजी को प्रणाम करते समय:


प्रथम लागुं दौ चरण को, धनी येह न छुडाओ छिन ।
लांक तले लाल एडियां, मेरे जीव को एही जीवन ॥


First and foremost, I bow to the two feet, O my Lord even for a moment do not separate it from me,
Under those feet are the red heels, these are only the life of my soul.


इन पाउं तले पडी रहुं, धनि नजर खोलो बातन ।
पल न वालुं निरखूं नेत्रेय, मेरे जीव के येहि जीवन ॥


Let me take refuge to this feet, O my Lord open my eyes of the soul (the internal eyes).
I will not for a moment look any other place, because your feet are the life of my soul.


सामुहिक जाप:


श्री कृष्ण सच्चिदानंद, परब्रह्म पूर्ण परमात्मा ।
इसी नाम को भज भज के,
सदा सुख लेओ हे आत्मा ॥


Shri Krishna -the ultimate truth, conscious (chaitanya) and the bliss, the Supreme Brahma of beyond, Absolute, the goal of the soul, repeating this name O soul live in eternal happiness.


पुष्प अर्पण:


येह पुष्प लेकर हाथ में, करुं अर्पण आज ।
बिनती येह स्विकार जो बाहं पकडके हाथ ॥


प्रदक्षिणा पूर्व प्रार्थना:


दै प्रदक्षिणा अति घणी, करुं दन्डवत प्रणाम ।
सहु साथना मनोरथ पूरण कर्जो, मारा धनी श्रीधाम ।

देत परिक्रमा कर्म सब छुटे, यह सुख पंचम निशदिन लूटे ॥


यात्रा पूर्व:


सदा महामती दाहिंने, सन्मुख सुन्दरसाथ ।
नाम लेत छत्रसाल को, सिद्ध होत सब काज ॥


भोजन पूर्व:


चौदह लोक तुम्हारी शाखा, जो दिन्हा सो आगे राखा ।
जो जो भावे सो सो लीजे, प्रसाद अपने दास को दीजे ॥


All the 14 lokas are your branches, whatever you have blessed I have offered you.
Please accept those that you favor the most, the left over (prasad) then give to your humble servant.


शुभ कार्य के समये:


मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरी श्याम ।
तुम्हारी कृपा कटाक्ष से, सुफल होत सब काम ॥


Oh my Lord Radhe Shyam, please get rid of the obstacles and difficulties.
By your kind glimpse, all the endeavor will be successful.


ज्यारे धणी धणवट करे, त्यारे बल वेरीनां हरे।
वली गयां काम सराडे चढे, मन चितव्यां कारज सरे ।।१

 
जब धामधनी रक्षा करते हैं अर्थात् अपनी शरणमें लेते हैं तब शत्रुका बल भी हरण कर देते हैं, जिससे बिगड.े हुए काम पुनः ठीक हो जाते हैं और मनोवाञ्छित कार्य भी सिद्ध होते हैं.
When Lord is there to protect, then mighty enemy cannot harm. The difficulties, troubles and obstacles are eliminated and the task is successful as desired.


सोने से पूर्व:


अरश तुम्हारा मेरा दिल है, तुम आपे करो आरम ।
सेज बिछाई रूच रूच के, धनि यहि तुम्हारा विश्राम ॥

 
The supreme abode, your paramdham is my heart, O my Lord you please relax over here. I have made the bed with so much care, My Lord, now this is your resting place.



कृष्ण कृष्ण सब कोइ कहे, पर भेद न जाने कोइ,
नाम एक विध है सही, पर भेद तीन विध होये,
एक भेद वैकुंठ का, दुज है गौलोक,
तीसरा धाम अखंड क, कहत पुरान विवेक
मांगा किया राधा बाई क, पर ब्याहे नहिं प्राणाथ,
मूल सनमंधे एके अंगे, विलसत वल्लभ साथ





Dear Sundarsathji,


धामधनी श्री कृष्ण हमारे, परम निधान परम रूप प्यारे ॥१॥
महाराजा मंगल रूप राजे, श्याम श्यामाजी दोउ अनूप बिराजे ॥ २॥
पूरण अक्षर पदसे न्यारे , सोई जियावर धनीजी हमारे ॥३ ॥
प्रगटे पीया नीज अद्भुत सोई , उपमा पार पावे नहीं कोई ॥४॥
परमानन्द जोड़ी सुखकारी , अंगना पिया पर वारी वारी ॥ ५ ॥


Our Lord of Paramdham is Shri Krishna who has the ultimate beautiful face, He is the supreme goal, The King rules the entire universe conferring happiness (auspicious), Shyam and Shyama both are so unique are enthroned. The Akshar Brahm who is whole (indivisible, imperishable, eternal living) beyond him that is our Lord who is the master of our heart. He has appeared before us is amazing one cannot ever completely glorify the unlimited. The ultimate blissful duo pair (Rajshyamaji) are the granter of happiness, the souls of Lord are totally surrendered!
(Know our Lord as Aksharateet Shri Krishna Shyam and Shyama and completely surrender ourselves to Him as we are of Him.)


ए दुनी न जाने सुपन की, न जाने मलकूती फिरस्तन।
ए अक्षर को भी सुध नहीं, जाने स्याम स्यामा मोमिन।।२३


The worldly people of dreams do not know this nor the angels from Vishnu's abode know about this. Even Akshar's cosmic mind is not conscious of this. Only the celestial souls Brahmshristi know Shyam Shyama.

Surrendering the self totally, Give obeisance to our Lord our master the Supreme Brahm, this one must in this state at all times.


प्रथम लागुं दौ चरण को, धनी येह न छुडाओ छिन ।
लांक तले लाल एडियां, मेरे जीव को एही जीवन ॥


First and foremost, I bow to the two feet, O my Lord even for a moment do not separate it from me,
Under those feet are the red heels, these are only the life of my soul.


इन पाउं तले पडी रहुं, धनि नजर खोलो बातन ।
पल न वालुं निरखूं नेत्रेय, मेरे जीव के येहि जीवन ॥


Let me take refuge in this feet, O my Lord open my eyes of the soul (the internal eyes).
I will not for a moment look any other place, because your feet are the life of my soul.


Close your eyes sundarsathji and make space in your heart by removing all the activities from your mind and cleaning it with force by nijnaam jaap(make sure the tongue does not move, it must be totally "mansik" from the mind), prostrating internally to Lord.


Invite beloved Lord the King of Kings Shri Raj, lover of lover the epitomy of Love who attracts our mind and heart to rest in our heart.


अरश तुम्हारा मेरा दिल है, तुम आपे करो आरम ।
सेज बिछाई रूच रूच के, धनि यहि तुम्हारा विश्राम ॥


The supreme abode, your paramdham is my heart, O my Lord you please relax over here. I have made the bed with so much care, My Lord, now this is your resting place.


आनन्द मंगल श्री धामधनीजीकी जय ।
श्री जुगल किशोरजीकी जय । श्री वृन्दावनचंद्रजीकी जय ।
श्री रासके रमैयाकी जय । श्री हुकमके स्वरूपकी जय ।
धनी श्री देवचन्द्रजीकी जय । श्री जियवर साहेबजीकी जय ।
श्री बाईजीराजजीकी जय । श्री महराजा छत्रसालजीकी जय ।
सर्व सुन्दरसाथजी की जय |


Pranam