• slide1
  • slide2
  • slide3
  • slide4
  • slide5
  • slide6

Paramdham: The ultimate abode of celestial souls

By Ranjanaoli

 

हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥


Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.


हम ब्रह्मसृष्ठ आई धाम से,अक्षर खेल देखन ।
खेल देख के जागिए, घर असलू अपने तन ॥


हम सभी ब्रह्मात्माएँ खेल देखने के लिए परमधाम से इस जगतमें आई हैं, अब इस खेलको देखकर जागृत हो जाइए, अपने मूल स्वरूप परमात्मा तो परमधाम में ही है॥


We the celestial souls have come to see this world which is full of misery, ignorance,amnesia of self knowledge. Haven't we seen enough! Time has come to realise that we are the part of satchidanand (Truth, eternal conciousness and bliss) and our abode is paramdham.


जो कोई निज धाम की, सो निकसो रोग पेहेचान।
जो सुरत पीछी खैंचहीं, सो जानो दुसमन छल सैतान।।


जो परमधामकी आत्माएँ हैं, वे राग-द्वेषरूपी रोगको पहचानकर उससे मुक्त हो जाएँ. परमधामकी ओर जा रही सुरताको जो मायाकी ओर खींचते हैं, उन्हें ही छल-कपट वाले शत्रु समझना.


All those souls who belong to Supreme Abode of within, understand all the diseases of this world (greed, prejudice, hatred etc) and come clean out of it. All the vices that keep you away from your true abode that is only your bitter enemy.


नूर रोसन बल धाम को, सो कोई न जाने हम बिन।
अंदर रोसनी सो जानहीं, जिन सिर धाम वतन।।


परमधामके दिव्य ज्ञानके प्रकाशके सामर्थ्यकी जानकारी हम ब्रह्मात्माओंके अतिरिक्त किसीको नहीं है. जिनको परमधामका दायित्व प्राप्त है, वे ही उसके अन्दरके प्रकाशको जान सकतीं हैं.


No one but the divine celestial souls know the splendour, illumination and power of the supreme abode paramdham. Those who are acquainted with light within, only those can experience the original abode of the supreme and bear the responsibility of Paramdham.


अरस कहिये दिल तिन का, जित है हक सहूर|
इलम इसक दोऊ हक के, दोऊ हक रोसनी नूर||

महासिंगार/२४/४२


Aras kahiae dil tin kaa, jit hai haq sahoor; Ilam isak dou haq ke, dou haq rosanee neer. Mahasingaar/24/42


उन्ही आत्माओं का दिल वस्तुतः परमधाम कहा गया है, जहाँ पर हर पल श्री राज जी का चिन्तन, उन्ही की चितवनी चलती रहेती है| वस्तुतः ज्ञान और प्रेम, दोनों ही श्री राजजी के तेजोमय प्रकाश स्वरुप की अमूल्य निधियाँ हैं|


Only that heart is said to be the Abode of the Lord Almighty, Paramdham, which contemplates on beloved Lord ceaselessly. Literally, Knowledge and Love of the Supreme Commander, both are His essence of His illuminous Form.


तुम लिखिया फुरमान में, हक अरस मोमिन कलूब|
तो सुकन पालो अपना, तुम हो मेरे महेबूब||

सागर/८/७


Tum likhiyaa furmaan mein, haq aras momin kaloob; To sukan paalo apnaa, tum ho mere meheboob. Saagar/8/7


आप ने ही कुरान में लिखवाया है कि ब्रह्मात्माओं का ह्रदय ही आप का परमधाम है| हे धनी! आप उन वचनों को पूर्ण करें| आप ही तो हमारे प्रियतम हैं|


You have proclaimed in Koran that the hearts of The celesial (brahm) souls is Your abode, is your Paramdhaam. O Almighty! Kindly fulfill your promise. You are our ONLY Beloved Lord.


मोमिन होए सो देखियो, तुमारा दिल कह्या अरस ।
चारों घाट लीजो दिलमें, दिल ज्यों होए अरस परस ।।८


हे ब्रह्मात्माओ ! तुम्हारे हृदयको परमधाम कहा है, इसीलिए तुम इस दृश्यको देखो ! इन चारों घाटोंको हृदयमें अङ्कित करो, जिससे तुम्हारा हृदय इन शोभाओंसे ओत-प्रोत हो जाए.


Behold O celesial souls (brahmatma, momin), its your heart is called the abode of the Lord the Paramdham. Visualize four banks of Paramdham in your heart by which the heart is drenched completely in its divinity.


एही पट आडे तेरे, और जरा भी नाहें।
तो सुख जीवत अरस का, लेवे ख्वाब के माहें।।३२


यही अहं तेरे और धामधनीके बीच आवरण बना हुआ है. इसके अतिरिक्त अन्य कोई आवरण ही नहीं है. इसको हटाने मात्रसे इस स्वप्नवत् संसारमें जीवित रहते हुए ही परमधामके सुखोंका अनुभव होगा.


This veil(ignorance,ego) is your main obstacle and there is nothing else. You could attain the bliss of eternal living of Paramdham while in this world of illusion.


हकें अरस किया दिल मोमिन, सो मता आया हक दिल से।
तुमें ऐसी बडाई हकें लिखी, हाए हाए मोमिन गल ना गए इनमें ।। ६


श्रीराजजीने ब्रह्मात्माओंके हृदयको परमधाम बनाया है. यह तारतम ज्ञाानरूपी सम्पदा भी उनके ही हृदयसे आई है. स्वयं धामधनीने तुम्हारी इतनी बड.ी प्रशंसा की है तथापि खेद है कि ब्रह्मात्माओंका हृदय द्रवित नहीं हो रहा है.


The Supreme Commander of the Universe our beloved Lord has made the heart of the celesial souls His Abode, the Paramdham and this intent also has come from His heart. Beloved Lord has praised you so much but alas my souls you could not melt in it.


वरनन करो रे रूहजी, हकें तुम सिर दिया भार।
अरस किया अपने दिल को, माहें बैठाओ कर सिनगार।।१


महामति कहते हैं, हे मेरी आत्मा ! श्रीराजजीने तुझे गुरुतर दायित्व सौंपा है. अब तू उनके शृङ्गारका वर्णन कर. उन्होंने ब्रह्मआत्माओंके हृदयको अपना धाम बनाया है. इसलिए तू सम्पूर्ण शृङ्गारसे सुसज्जित उनके स्वरूपको अपने हृदयमें अङ्कित कर.


Let me describe you O my Souls,says Mahamati, how Beloved Lord has expected you to take the great responsibility. He has made His abode our heart so adorn your heart, Him seated with all His splendor.


रात दिन बसें हक अरस में, मेरा दिल किया अरस सोए।
क्यों न होए मोहे बुजरकियां, ऐसा हुआ न कोई होए।।३


श्रीराजजी सर्वदा अखण्ड परमधाममें रहते हैं. अब उन्होंने मेरे हृदयको अपना परमधाम बनाया है. इसलिए मुझे श्रेष्ठतम गौरव क्यों प्राप्त नहीं होगा ? यह विशेषता आज तक किसीको भी प्राप्त नहीं हुई हैं और भविष्यमें भी नहीं होगी.


Eternally,Beloved Lord (the Supreme Commander) dwells in indivisible, imperishable Paramdham. He has made my heart as his dwelling place and thus has turned into Paramdham. How could I not feel the gratitude, nothing such as this has ever happened before nor shall ever happen after.


पहेले कहूं अव्वल की, हक हादी हुकम।
मोमिन दिल अरस में, हकें धरे कदम।।१


महामति कहते हैं, अब मैं सर्वप्रथम श्रीराजजी और श्री श्यामाजी(श्री देवचन्द्रजी) के आदेशानुसार परमधाम मूलमिलावेका वृत्तान्त कहता हूँ. जिस प्रकार श्री राजजीने ब्रह्मात्माओंके हृदयको परमधाम बनाकर उनमें अपने चरणकमल प्रतिष्ठित किए हैं.


Let me tell you about the original abode by the will of Our beloved Lord and Shri Devachandraji Maharaj(Shyama) that the souls in the Paramdham has adorned their heart with the feet of the Lord.


दिल मोमिन अरस कह्या, सैतान दुनी दिल पर ।
क्यों गिरो दुनी भेली चले, भई तफावत यों कर ।।१५


इसीलिए ब्रह्मात्माओंके हृदयको परमधाम कहा है, नश्वर जगतके जीवोंके हृदयमें तो दुष्ट इब्लीसका साम्राज्य है. इस प्रकार नश्वर जगतके जीव
ब्रह्मात्माओंके साथ कैसे चल सकते हैं ? इन दोनों समुदायोंमें यही अन्तर है.


The heart of the celestial soul is the true abode of the Lord (eternal, imperishable, absolute Paramdham) but the Satan(Maya) rules the heart of the worldly people. How can these two group go hand in hand when there is nothing common between them.


दिल अरस मोमिन कह्या, तित आए हक सुभान ।
सो दिल पाक औरों करे, जाए देखो मगज कुरान ।।४३


ब्रह्मात्माओं (मोमिनों) के दिलको तो परमधाम कहा है, जहाँ परमात्मा (हक सुभान) आकर विराजमान होते हैं. ऐसी आत्माएँ अन्य लोगोंके दिलोंको भी पवित्र बना देतीं हैं. जरा कुरानके रहस्योंको तो समझो.


The heart of the souls is the abode of Lord where dwells the Supreme Lord. Such souls will purify other souls go kindly understand the intelligence of the Holy Quran.


राह पकडे तौहीद की, धरे महंमद कदमों कदम।
सो जानो दिल मोमिन, जिन दिल अरस इलम।।१९


जो आत्माएँ अद्वैतका मार्ग ग्रहण कर अन्तिम मुहम्मद (मेरे) के पदचिह्नों पर चलती हैं तथा जिनका हृदय परमधामके ज्ञाानसे प्रकाशित है, उन्हीं ब्रह्मात्माओंके हृदयको परमधाम कहा गया है.


Those who choose the path of Non-dual(worshipping only one Lord) and follows me step by step, are the supreme celesial souls and whose heart is abode of Supreme intelligence.


दिल मोमन अरस कह्या, बडा बेवरा किया इत।
दुनी दिल पर इबलीस, यों कहे कुरान हजरत।।४


ब्रह्मप्रियाओंके हृदयको परमधाम कहा है कुरानमें उनकी महिमाका वर्णन विस्तारपूर्वक हुआ है. इसी प्रकार हजरत मुहम्मदने कुरानमें यह भी कहा है कि संसारके लोगोंके हृदयमें दुष्ट इबलीसकी बैठक है.


The heart of the souls is the abode of Lord it is appreciated and explained extensively here. The heart of the worldly people is ruled by Satan (Iblish) Maya says so Hajrat Mohammad in holy Quran


हकीकत सों समझावना, समझें इसारतसों मोमन।
हक सूरत द्रढ कर दई, तब दिल अरस हुआ वतन।।६३


यह भी कहा है कि ब्रह्मात्माओंको यथार्थ ज्ञानके द्वारा समझाना, वे सङ्केत मात्रसे ही समझ जाएँगी. उन ब्रह्मात्माओंने जब परब्रह्म परमात्माके स्वरूपको अपने हृदयमें दृढ. कर लिया तभी उनका हृदय परमधाम कहलाया.


While teaching with the help of realities of the world, the celestial souls will understand even the cues or signals (hidden not explicitly said). They will adorn the form of the Supreme Commander in their heart and then the heart will be abode of Supreme, Paramdham.


महंमद बतावें हक सूरत, तिनका अरस दिल मोमन।
सो अरस दिल दुनी छोड के, पूजे हवा उजाड जो सुन।।८३


रसूल मुहम्मदने परमात्माका स्वरूप बताया है और उनका धाम ब्रह्म आत्माओंका हृदय बताया है. ऐसी (धामहृदया) ब्रह्म आत्माओंको छोड.कर संसारी जीव उजाड. शून्य-निराकारकी पूजा करते हैं.


Mohammad Rasool has described the form of the Supreme Lord and have also said the abode of Lord Supreme is the heart of the celestial souls. The worldly people worship nothingness,empty and formlessness as God instead of following such souls whose heart is abode of the Supreme.


तो अरस कह्या दिल मोमिन, पाया अरस खिताब।
इतहीं गिरो पैगंमरों, काजी कजा इत किताब।।८


ब्रह्मसृष्टिके हृदयको इसलिए परमधाम कहा है क्योंकि उनको ही परमधामके होनेका सौभाग्य प्राप्त हुआ है. इन्हींके बीच पैगम्बरोंका समुदाय समाहित हुआ है और कुरानके अनुसार परमात्माने भी इन्हींके साथ आकर न्याय किया.


The heart of the souls is the abode of Lord as they have attained the honour of Paramdham(It is their original abode). The paigambars later joined them and Lord has done justice with them says the holy Quran.


अरस कह्या दिल मोमिन, सब अरस में न्यामत।
कह्या और दिल पर इबलीस, अब देखो तफावत।।८६


ब्रह्मात्माओंके हृदयको परमात्माका धाम कहा गया है, उसी हृदयमें परमधामकी सभी सम्पदा समाई हुई है. संसारके अन्य लोगोंके हृदय पर तो दुष्ट इबलीसका साम्राज्य कहा गया है. देखो, ब्रह्मात्माओं और संसारके सामान्य जीवोंमें यही अन्तर है.


The heart of the souls is the abode of Lord along with all the splendor and bounties of the Paramdham. It is said the Satan(Maya) rules the heart of the worldly people.These are the main distinction between the two.


दिल मजाजी जो कहे, ताकों अरस दिल कबूं न होए ।
सो आए न सके वाहेदतमें, जिन दिल इबलीस कह्या सोए ।।२


जिनका हृदय मोहग्रस्त है वह परमात्माका धाम कभी नहीं हो सकता है. इसलिए नश्वर जगतके जीव कभी भी दिव्य परमधाममें नहीं आ सकते हैं. क्योंकि उनके हृदयमें दुष्ट इब्लीसका साम्राज्य है.


The heart which pursuits the worldly pleasure, is under the control of the senses and follows the will of the senses that heart cannot be the abode of the beloved Supreme Lord. Such souls can never be able to reach Paramdham and its eternal splendor, as their heart is ruled by the Satan (Iblish).


महामत कहें ऐ मोमिनो, राह बका ल्योगे तुम।
जिन का दिल अरस कह्या, औरों ना निकसे मुख दम।।८८


महामति कहते हैं, हे ब्रह्मात्माओ ! उक्त अखण्ड मार्ग पर तुम ही चल पाओगे, तुम्हारे हृदयको ही परमात्माका धाम कहा गया है. अन्य लोग


Oh my divine souls, only you can walk the walk of eternal and imperishable path and your heart is called the Paramdham the abode of beloved Lord. Other people enmeshed in worldly pleasure and pain cannot dare to agree to join this path even verbally and shall walk out of it.


तो हुकम दिया दिल अरस किया, हकें कह्या महंमद मासूक।
ए कौल सुन रूह मोमिन, हाए हाए हुए नहीं टूक टूक।।१५


अपना आदेश देकर धामधनी श्री श्यामाजी (सद्गुरु) के हृदयमें स्वयं विराजमान हुए और उनके हृदयको परमधाम बना दिया. धामधनीने श्यामाजीको अत्यन्त प्रिय कहकर उनकी प्रशंसा की. हाय ! इन वचनोंको सुनकर भी ब्रह्मात्माओंका हृदय विदीर्ण हो टुकड.े-टुकड.े नहीं हुआ. इस मार्गकी बात भी मुखसे नहीं कह सकेंगे (फिर चलनेकी बात तो दूर ही रह गई).


The Lord first willed and made the heart of Shri Devachandraji his abode. Lord said to Shri Shyama that she is extremely dear to her and praised her. Alas, listening to these words when your heart did not turn into pieces out of separation and longing for Lord, then how can you walk on this path.


दिल अरस मोमिन कह्या, जामें अमरद सूरत।
छिन ना छूटे मोमिनसे, मेहेबूब की मूरत।।३१


ब्रह्मात्माओंके हृदयको ही परमधाम कहा गया है. क्योंकि उसमें किशोर स्वरूप परब्रह्म परमात्मा विराजमान हैं. इसलिए ब्रह्मात्माओंके हृदयसे क्षण मात्रके लिए भी प्यारे परमात्माका स्वरूप दूर नहीं होता.


The heart of celestial souls is the abode of Supreme, Paramdham, where resides the eternal living Lord's face. The celestial souls cannot live for a moment without beloved Shri Rajji the Supreme Lord's image.


दिल मोमिन अरस कह्या, ए जो असल अरसमें तन।
ए लिख्या फुरमानमें जाहेर, पर किया न बेवरा किन।।३५


ब्रह्मात्माओंके हृदयको परमधाम कहा गया है. उनका चिन्मय शरीर पर-आत्मा परमधाममें है. इस प्रकार कुरानमें स्पष्ट कहा है किन्तु किसीने भी उनका विवरण नहीं दिया कि वे ब्रह्मात्माएँ कौन हैं ?


The heart of celestial souls is the abode of Supreme, Paramdham whose real body is in the Paramdham itself the one over here is only the Surta(do not know in English) in the Jeev of this world. This is very clearly stated in holy Quran but no one has thrown light on who these souls are?


और दिल हकीकी अरस मोमिन, हकें दिल अरस कह्या इन।
दिल मजाजी गोस्त टुकडा, और ऊपर कह्या दुसमन।।४०


परमधामकी ब्रह्मात्माएँ ही सत्य हृदया हैं. इनके हृदयको ही परमात्माने अपना धाम कहा है. संसारके जीवोंका हृदय तो मात्र मांसपिण्ड है और उसमें भी दुष्ट शत्रु (इबलीस) बैठा हुआ है.


दुनियां दिल मजाजी इबलीस, दिल हकीकी पर हक।
एक गिरो दिल अरस कही, सोई अरस रूहें बुजरक।।४१


नश्वर जीवोंके झूठे हृदय पर दुष्ट इबलीस बैठा हुआ है एवं सत्य हृदय पर परमात्माकी बैठक है. जिस एक समुदायके हृदयको परमधाम कहा है वह परमधामकी श्रेष्ठ आत्माओंका ही समुदाय है.


वाहेदत निसबत अरस की, जब जाहेर हुई खिलवत।
ए सुकन सुन मोमिन, दिल लेसी अरस लज्जत।।४८


परमधामका अद्वैत सम्बन्ध एवं मूलमिलावाका अन्तरङ्ग रहस्य जब तारतम ज्ञाानके द्वारा स्पष्ट हो ही गया है तो इन वचनोंको सुनकर ब्रह्मात्माएँ अपने हृदयमें परमधामका आनन्द अनुभव करेंगी.


हम बंदे रूहें इन दरगाह के, कह्या दिल अरस मोमन।
यारों बुलावें महंमद, करो सेजदा हजूर अरस तन।।४


हम आत्माएँ इसी परमधामके वासी हैं और हम ब्रह्मात्माओंको धामहृदया भी कहा गया है. श्यामाजी अपने आत्माओंको बुलाकर कह रही हैं कि परमधामके अपने चिन्मय शरीरके द्वारा धामधनीके चरणोंमें प्रणाम करो.


कोई पांच बिने की दस करो, पालो अरकान लग आखर।
पर अरस बका हक का, दिल होए न मोमिन बिगर।।३०


कोई इन पाँच नियमोंके स्थान पर धर्मके दस नियमोंका पालन अन्तिम समय (कयामतकी घड.ी) तक क्यों न करे किन्तु ब्रह्मात्माओंके हृदयके अतिरिक्त अन्य किसी भी जीवका हृदय परमात्माका धाम नहीं बन सकता.


हक हादी रूहें लाहूतमें, ए महंमद रूहों वतन।
इसक हकीकत मारफत, तो हक अरस दिल मोमन।।५५


परब्रह्म परमात्मा श्रीराजजी, श्यामाजी तथा ब्रह्मात्माएँ इसी परमधाममें हैं. यही तो ब्रह्मात्मा तथा श्यामाजीका मूल घर है. इन्हीं ब्रह्मात्माओंमें अपने धनीका अखण्ड प्रेम, यथार्थ ज्ञाान तथा पूर्ण पहचान है. इसीलिए इनके हृदयको परमात्माका धाम कहा गया है.


अरस दिल इनका कह्या, और कह्या हकीकी दिल।
एती बडाई इनको दै, जो वाहेदत इनों असल।।६४


इन्हीं आत्माओंके हृदयको परमधाम कहा गया है. ये ही आत्माएँ सत्यहृदया कही गइंर् हैं. इनको इतनी महत्ता इसीलिए दी गई है कि ये स्वयं परब्रह्मसे अभिन्न तथा अद्वैत हैं.


चौदे तबक की जहानमें, किन तरफ न पाई अरस हक।
सो किया अरस दिल मोमिनों, ए निसबत मेहेर मुतलक।।६९


चौदह लोकोंकी सृष्टिमें किसी भी जीवको परमधाम तथा परमात्मा (परब्रह्म) का मार्ग प्राप्त नहीं हुआ. जबकि परमात्माने ब्रह्मात्माओंके हृदयको अपना परमधाम बनाया. वस्तुतः अद्वैत सम्बन्धके कारण ही उन पर यह विशेष कृपा हुई है.


जो मोमन बिने पांच अरसमें, सो होत बंदगी बातन।
जिन विध होत हजूर, सो करत अरस दिल मोमन।।२


ब्रह्मात्माओंके लिए कहे गए धर्मके पाँच नियम तो वस्तुतः परमधाममें ही अध्यात्मिक रूपसे सम्पन्न होते हैं. धामधनीके सान्निध्यमें जैसी उनकी दिनचर्या होती है उसीके अनुरूप धामहृदया आत्माएँ नश्वर संसारमें भी आचरण करती हैं.


दिल अरस हकीकी तो कह्या, जो हक कदम तले तन।
रसूल उमती उमती तो कहे, जो हक खिलवत बीच रूहन।।३


ब्रह्मात्माओंको इसीलिए धामहृदया कहा है कि उनकी परआत्मा परमधाममें धामधनीके चरणोंमें है. रसूलने वारंवार इनको ब्राह्मी समुदाय इसीलिए कहा कि ये आत्माएँ परमधाम मूलमिलावामें धामधनीके चरणोंमें ही हैं.


तिन हकें मोमिन दिल को, अपना कह्या अरस।
कह्या तुम भी उतरे अरस से, यों दै सोभा अरस परस।।३२


धामधनीने ब्रह्मात्माओंके हृदयको अपना परमधाम कहा है तथा यह भी कहा है कि तुम स्वयं परमधामसे इस संसारमें आई हो. इस प्रकार धामधनीने हमारा अद्वैत सम्बन्ध स्पष्ट कर परस्पर शोभा बढ.ाई है.


ए इलम लिए ऐसा होत है, रूह अपनी साहेदी देत।
बैठ बीच ब्रह्मांड के, अरस बका में लेत।।४९


इस तारतम ज्ञानको प्राप्त करने पर इस प्रकार अन्तर्दृष्टि खुल जाती है और आत्मा अपनी ही साक्षी देने लगती है. तब इस नश्वर संसारमें रहते हुए भी अखण्ड परमधामका अनुभव होने लगता है.


असल आराम हिरदे मिने, अरस को अखंड।
तब ए झूठे ख्वाब को, रहे न पिंड ब्रह्मांड।।९


जब हृदयमें परमधामके वास्तविक आनन्दका अनुभव हो जाएगा तब इस स्वप्नवत् खेलके पिण्ड तथा ब्रह्माण्डका अस्तित्व भी मिट जाएगा.


कायम हक के अरसमें, बैठे अपने ठौर।
हक के इत वाहेदतमें, कोई नाहीं काहूं और।।१०


धामधनीके अखण्ड घर परमधामके मूलमिलावामें हम सब आत्माएँ बैठी हैं. धामधनीके इस अद्वैत भूमिमें उनके अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है.


We all are sitting in the eternal imperishable abode of the Lord firmly. In this land of the Supreme Lord there nothing but Lord.


महामत कहे ऐ मोमिनो, इसक लीजे हक।
असल अरस के बीचमें, हक का नाम आसिक।।११


महामति कहते हैं, हे सुन्दरसाथजी ! इस प्रकार धामधनीका अखण्ड प्रेम प्राप्त करो. क्योंकि अखण्ड परमधाममें श्रीराजजीको प्रेमी (आशिक) कहा गया है.


Mahamati Shri Prannath says O seeker, win the love of our beloved Lord. In the absolute abode, the Supreme commander is known as the lover.


एक हक बिना कछू ना रखें, दुनी करी मुरदार।
अरस किया दिल मोमिन, पोहोंचे नूर के पार।।१


ऐसी ब्रह्माङ्गनाएँ अपने दिलमें धामधनीके अतिरिक्त कुछ भी नहीं रखतीं. उन्होंने नश्वर संसारको मृतक तुल्य (तुच्छ) माना है. इसलिए धनीजीने ऐसी ब्रह्माङ्गनाओंके हृदयको परमधाम बना दिया. वे ही अक्षरके परे परमधाममें पहुँच सकीं हैं.


Supreme souls contemplate on One Lord and nothing else. They treat entire world as lifeless objects and are not affected by the external changes. The heart of such soul is the abode of the beloved Lord and they reach the Paramdham which is beyond Akshar.


दिल दिलगीरी छोड दे, होत तेरा नुकसान।
जानत है गोविंद भेडा, याको पीठ दिए आसान।।४


तुम हृदयकी हताशाको छोड. दो, इससे तो तुम्हें हानि हो रही है. यह संसार गोविन्द भेड.ा (भूतनगरी) के समान है. इसको पीठ देनेसे ही परमधामका मार्ग सरल बनेगा.


O my Souls, you abandon the pursuit of heart of joy and sorrow, it just harms you (distracts you from your soul goal). This world is an illusion and its pursuits are wasteful.Ease yourself by turning your back towards it.


बचन हमारे धाम के फैले हैं भरत खंड ।
अब पसरसी त्रैलोक में, जित होसी मुक्त ब्रह्मांड ॥


हमरे परमधामकी बातें पूरे भरतखण्ड में फैली है। अब चौदह लोकों में इसका विस्तार होगा, जिससे ब्रह्माण्ड के जीव मुक्त हो जाएँगे।


The words of paramdham is spread in Indian subcontinent. Now, it has to spread over entire universe and free all the living beings.